दुष्टों का करने को संगार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुष्टों का करने को संगार माँ चंडी रूप लिया,

भक्तो के भरने को भंडार माँ मनसा रूप लिया,

चंडी बन चंड मुंड को मारा मनसा बन भगतो को तारा,

धाम दोनों का हरिद्वार यही अवतार लिया,

दुष्टों का करने को संगार......

शुम्ब निशुमब चंडी ने मारे,मनसा ने भगत पार उतारे,

बेडा लगया सबका पार,है भव से पार किया,

दुष्टों का करने को संगार.....

महिषा सुर जब पाप बढाया,

माँ चंडी ने मार गिरया,

उतरा माँ धरती का भार हर पापी मार दिया,

दुष्टों का करने को संगार.......

मनसा पूरी मनसा करती खाली झोली सबकी भरती,

प्रेम से बोलो जय जय कार सभी को दरस दिया,

दुष्टों का करने को संगार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।