तू ही दुर्गा तू ही महाकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू ही दुर्गा तू ही महाकाली सबकी झोली माँ तू भरने वाली,

तेरा मेरा है जन्मो का नाता मैं हु बेटा और तू मेरी माता,

तू बनाती है माँ सबकी बिगड़ी जो भी आता है दर पे सवाली,

तू ही दुर्गा तू ही महाकाली......

तूने तारा रुक्मण को माँ तारा श्री दर पंडित को पार उतरा,

मैया वैष्णो का रूप लेके तूने भेरो बलि को था मारा,

दर्शन देके मेरे भाग जगा दे भव में नैया मेरी पार लगा दे,

बड़ी उम्मीद से आया हु तेरे दर पे,

आया दर पे अम्बे मैया लेके हाथो में पूजा की थाली,

तू ही दुर्गा तू ही महाकाली......

शेर पे तू सवार होके आना मैया बिलकुल ना देर लगना,

पापो से कलयुग भरा है तेरे चरणों का है बीएस ठिकाना,

पाप और ताप मैया सह नही जाए तेरे मंदिर के सिवा और कहा जाए,

तेरे आंचल की छइया तले माँ मेरी होली है मेरी दिवाली,

तू ही दुर्गा तू ही महाकाली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।