एक बार वंदना अनेक बार वंदना

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

एक बार वंदना अनेक बार वंदना,

जी हाथ जोड़ गुरा नु मेरी वंदना,

सतगुरु मेरे पारभरम है,

दिन रात जगदे ज्योत आगम है,

जे तेरे द्वारे तो आनो नाहियो संगना,

जी हाथ जोड़ गुरा नु मेरी वंदना,

एक बार.......

डगमग डोले नैया मेरी,

मुझे आस है सतगुरु तेरी,

जी असा भव सागर पार लंगना,

जी हाथ जोड़ गुरा नु मेरी वंदना,

एक बार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।