हे पतीत पावनी गंगा कैसे में तुझे बुलाऊ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ,

हे पतीत पावनी गंगा कैसे में तुझे बुलाऊ,

नैनों में ज्योति नही है कैसे तेरा दर्शन पाऊ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ,

मैने सुना हे गंगा मईया अमृत सा तेरा जल है ,

तेरी स्वर्ग से उतरी धारा निर्मल उज्जवल शीतल है ,

ऐ माँ ममता के आंचल में, मैं भी तो सो जाऊ ,

नैनों में ज्योति नही है कैसे तेरा दर्शन पाऊ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ,

अंधा हुँ गिर गिर के में राहो में संभलता आया ,

बेदर्द जमाना मुझको पग पग पर ढेस लगाए ,

तेरे बिना ना कोई जग्ग में ये दर्द में किसे सुनाऊ,

नैनों में ज्योति नही है कैसे तेरा दर्शन पाऊ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ ,

माँ गंगे माँ गंगे माँ गंगे माँ,

सब अपने हुए पराये गेरों का क्या हे सहारा,

मेरी बूढ़ी माँ मेरे घर में, मैं उसकी आँख का तारा,

करदे मईया तु मै धन्ये धन्ये हो जाओ ,

नैनों में ज्योति नही है कैसे तेरा दर्शन पाऊ ,

हे पतीत पावनी गंगा कैसे में तुझे बुलाऊ,

नैनों में ज्योति नही है कैसे तेरा दर्शन पाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।