प्राथना कर जोड़ के

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॥ पावन पाठ ॥

प्राथना कर जोड़ के लीला अपनी छोड़ के आओ ना गुरुदेव ॥

सब अधीर हो रहे सारे सादक रो रहे आओ ना गुरुदेव,

आप के दर्शन बिना कुछ भी ना अब बाहता हमें,

याद कर कर आपकी मन बहुत तड़पाता हमें,

कष्ट इतना ना सहो दूर हमसे ना रहो,

आओ ना गुरुदेव...........

हे प्रभु जो बन पड़ा वह सभी तो हमने किया,

पर सफलता ना मिली है जल रहा है सबका दीया,

आप ही कुछ कीजिये शिगर दर्शन दीजिये,

आओ ना गुरुदेव...........

क्या करे हम सभी अब कुछ भी समज ना आ रहा,

अभी तक का हर परयास बिफल ही होता जा रहा,

विपति ये हमारी हरो वेरना कुछ तो करो,

आओ ना गुरुदेव.........

सुना आश्रम आप बिन है सभी व्याकुल हो रहे,

आप के सनेथय बिन सब धेरये अपना खो रहे,

कर किरपा अब आओ ना विपतदी दूर भगाओ ना,

आओ ना गुरुदेव...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।