नचना पैरा विच घुंगरू पाके

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नचना नचना नचना नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

अयोध्या तो मेरे राम जी आये,

सीता जी नु नाल ले आये,

सीता ने भी नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

नचना नचना.........

वृन्दावन तो श्याम जी आये,

राधा जी नु नाल ले आये,

राधा ने भी नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

नचना नचना.........

स्वर्ग लोक तो विष्णु जी आये,

लक्ष्मी जी नु नाल ले आये,

लक्ष्मी ने भी नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

नचना नचना.......

कैलाश पर्वत तो शिवजी आये,

गौरा जी नु नाल ले आये,

गौरा ने भी नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

नचना नचना.....

पहाड़ा तो मेरी मैया आयी,

शेर अपना नाल ले आयी,

मैया ने भी नचना पैरा विच घुंगरू पाके,

नचना नचना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।