चले आबे ओ दाई अंगना म मोर

मदन चौहान( गुरु जी)
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चले आबे ओ दाई अंगना म मोर,

सोला सिंगर करके लाली चुनरियाँ ओह्ड़े,

आवत अंगना बटोरे हो मईया मोर , गंगा जल छिड़कावत वो,

चन्दन पीठुलिया म बइठे ल देव, जमुना पाव पखारव वो,

चले अबे मईया......

कंचन धारी म नरियर धरके,सूंदर आरती उतरांव वो,

पारा परोशीन सखिया बलाक़े, मंगल गीत गावव वो,

चले आबे ओ मईया.....

पंचरित के भोग लगावव,गइया के दूध पियावव वो,

पलंग बिछवना बइठे ल देवव,बीड़ा पान खवाव वो,

चले आबे ओ मईया.....

पाव पैजनियां खनके वो मैया मोर,चुटकी बिछिया बाजय वो,

सातो सखिया मिल तोर जस गावय, शेखर सुर लमावय वो,

चले आबे ओ मईया...

गायक : मदन चौहान( गुरु जी)

रायपुर छत्तीसगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।