झंडे वाली है वो शेरा वाली है वो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रहमतो का ख़जाना लुटाती है जो,

झंदेवाली है वो शेरा वाली है वो,

सबको सीने से अपने लगती है जो ,

झंडे वाली वो शेरा वाली है वो......

हर कहानी को एक मोड़ मिलता नया,

दिल में आशा का गुलशन खिलता नया,

रास्तो से कटीले बचाती है जो,

झंडे वाली वो शेरा वाली है वो......

दर पे आये का सत्कार करती सदा,

पास अपने भुला प्यार करती सदा,

दिल के जख्मो पे मरहम लगती है जो,

झंडे वाली वो शेरा वाली है वो......

छोड़ जाता है तनहा के जब हर कोई,

अपना साया भी हो जाये जब अजनबी,

हाथ एसे में अपना बढाती है जो,

झंडे वाली वो शेरा वाली है वो......

कौन साहिल है एसा बता तो सही,

कोई मैया के जैसे दिखा तो सही,

भोज ओरो का खुद पे उठा ती है जो

झंडे वाली वो शेरा वाली है वो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।