शेरवाली माँ पहाड़ावाली माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरवाली माँ पहाड़ावाली माँ

बचिया दे सिरा उत्ते कर ठंडी छा

लोकी कहन्दे ने मावा ठंडिया छावा

पुत्तर रूस्दे ना रूसदिया मावा,

येहो लाल तेरा तेरे द्वार खड़ा

दुरकारी ना शेरावाली माँ पहाड़ावाली माँ

बचिया दे............

पाप करमा तो सानु बचाई माँ

भूले विसरिया नु रस्ते पाई माँ

भूलनहार असी बख़शणहार तुसी

होर मंगदायी ना शेरावाली माँ पहाड़ावाली माँ

बचिया दे........

इस जहा में कोई भी ना मेरा

झूठा जग है चौरासी वाला फेरा

भगत पे मेहर कर

भगत तेरा माँ शेरावाली माँ पहाड़ावाली माँ

बचिया दे.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।