ऐ मालिक तेरे बंदे हम

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॥ पावन पाठ ॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम,

ऐसे हो हमारे करम।

नेकी पर चले और बदी से टले,

ताकी हसते हुये निकले दम॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम,

बड़ा कमजोर है आदमी,

अभी लाखों हैं इस में कमी,

पर तू जो खड़ा, है दयालू बड़ा,

तेरी किरपा से धरती थमी॥

दिया तूने हमें जब जनम,

तू ही झेलेगा हम सब के ग़म,

नेकी पर चले और बदी से टले,

ताकी हसते हुये निकले दम॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम

ये अंधेरा घना छा रहा,

तेरा इन्सान घबरा रहा,

हो रहा बेख़बर, कुछ ना आता नज़र,

सुख का सूरज छुपा जा रहा॥

है तेरी रोशनी में जो दम,

तो अमावस को कर दे पूनम,

नेकी पर चले और बदी से टले,

ताकी हसते हुये निकले दम॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम

जब जुल्मों का हो सामना,

तब तू ही हमें थामना,

वो बुराई करे, हम भलाई करे,

नहीं बदले की हो कामना॥

नेकी पर चले और बदी से टले,

ताकी हसते हुये निकले दम॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम

बढ़ उठे प्यार का हर कदम,

और मिटे बैर का ये भरम,

नेकी पर चले और बदी से टले,

ताकी हसते हुये निकले दम॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।