प्रथम देव गुरुदेव जगत में और ना दूजो देवा

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

प्रथम देव गुरुदेव जगत में, और ना दूजो देवा ।

गुरु पूजे सब देवन पूजे, गुरु सेवा सब सेवा ॥

गुरु इष्ट, गुरु मन्त्र देवता, गुरु सकल उपचारा ।

गुरु मन्त्र, गुरु तंत्र गुरु है, गुरु सकल संसारा ॥

गुरु आवाहन, ध्यान गुरु है, गुरु पञ्च विधि पूजा ।

पुरु पद नमन, काव्य गुरु पावक, सकल वेद गुरु दूजा ॥

गुरु होता गुरु, याग महा यश, गुरु भगवत ईशा ।

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु सदा शिव, इन्द्र वरुण दिग दीषा ॥

बिन गुरु जप तप दान व्यर्थ व्रत, तीर्थ फल नहीं दाता ।

लक्ष्मी पति नहीं सिद्ध गुरु बिनु, वृथा जीव जग जाता ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।