मन चंचल चल राम शरण में

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

माया मरी ना मन मरा, मर मर गया शरीर ।

आशा तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर ॥

माया हैं दो भान्त की, देखो हो कर बजाई ।

एक मिलावे राम सों, एक नरक लेई जाए ॥

मन चंचल चल राम शरण में ।

हे राम हे राम हे राम हे राम ॥

राम ही तेरा जीवन साथी,

मित्र हितैषी सब दिन राती ।

दो दिन के हैं यह जग वाले,

हरी संग हम हैं जनम मरण में ॥

तुने जग में प्यार बढाया,

कितना सर पर भार उठाया ।

पग पग मुश्किल होगी रे पगले,

भाव सागर के पार तरन में ॥

कितने दिन हंस खेल लिया है,

सुख पाया दुःख झेल लिया है ।

मत जा रुक जा माया के संग,

डूब मरेगा कूप गहन में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।