मेरी लगिया प्रीत मैया तोडयो ना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगिया प्रीत मैया तोडयो ना,

मैनु चरनी लगाके मुख मोडयो ना,

इक प्रेमी सी भगत मैया दा प्यार मैया नाल पाया,

लखा ठोकर मरिया माँ ने खूब सुनाया अजमाया,

उसदे अंदर रोम रोम माँ दा नाम ध्याया ,

मेरी लगिया.......

जे मैं हुँदा काग कबूतर विच पहाड़ी रेह्न्दा,

सारा दिन मैं चोका चुकदा माँ दे नाल रेह्न्दा,

मैया रानी दर तेरे ते अहियो पानी पैंदा,

मेरी लगिया.......

सुबहे सवेरे बागा दे विच मुँह मलिया ने खोले,

पत्ता पत्ता डाली डाली जय माता दी बोले,

भवरा मैया बाग दे अंदर अहियो पानी बोले,

मेरी लगिया......

दर तेरे ते बचे आखे सुन मेरी अरजोई,

लखा पापी तारे माँ ने मेरी वारी क्यों तोई,

दर तेरे बछड़े आखे अखा भर के रोई,

मेरी लगिया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।