मुख दुनिया मोड़ेगी दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुख दुनिया मोड़ेगी दातिए तू मुखड़ा ना मोड़ी,

सदिया लगियां प्रीता नु दातिए तू एवे ना तोड़ी,

तेरे खातिर अम्बे रानी,

छोड़ दिती मैं दुनिया सारी,

तेरा पल्ला फड़या नि माँ अम्बे आध विचकार ना छोड़ी

सदिया लगियां.........

लोकी मारन मैनु ताने,

अपने मेरे होये बेगाने,

मैं विनती करदी है माँ अम्बे तू रिश्ता ना तोड़ी,

सदिया लगियां..........

तेरी साड़ी प्रीत पुराणी,

एहे गल आज तक किसे न जानी,

तेरे दर ते आइय नि माँ अम्बे दर तो खाली ना मोड़ी,

सदिया लगियां............

तुर दी फिरदी कलम कलि ,

लोकी मेनू आखन छली,

तेरे हाथ मैं जोड़ा नही माँ अम्बे दिल तो कदे न विछोडी,

सदिया लगियां............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।