नवरात्रों में नो चुनिया मैं लाइ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवरात्रों में नो चुनिया मैं लाइ मातारानी

नो के नो व्रत रखे तेरी बेटी ने महारानी,

पूरी नो कंजको को जिमाया नोक्राए के संग में बिठाया,

नवरात्रों में नो चुनिया मैं लाइ........

नो रातो से नो दिन पहले करली सब तयारी

घर आँगन गंगा जल से धोये बारी बारी,

जय माता दी बोल बोल के पवन करली वाणी,

रंग ले आये तेरी मेरी प्रीत पुराणी,

तेरा दरबार जब माँ सज्या मैंने नो बार सिर को झुकाया,

नवरात्रों में नो चुनिया मैं लाइ....

सारी सारी रात मैं जागी तेरे जगरातो में,

मेहँदी रोज लगाई मैंने माता तेरे हाथो में,

नो भागो से फूल मंगवा कर माला रोज बनानी,

तेरी खातिर नो मेवों की थाली रोज सजानी,

भोग नो दुर्गा माँ को लगाया,

प्रेम से फिर माँ प्रशाद खाया,

नवरात्रों में नो चुनिया मैं लाइ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।