कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया ,॥यहां लाज मेरी लुटी जा रही है

दुशासन के हाथों से तेरी द्रौपदी की ,॥सभा बीच साड़ी खिंची जा रही है

कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया ,॥

जिन्होंने कभी मेरी सूरत न देखी ,वो देखेंगे नंगा बदन आज मेरा

जुयें में पति मेरे हारे हैं बाजी ,॥ये महलों की रानी लुटी जा रही है

कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया ,॥

गुरुदेव बोलो पितामह जी बोलो ,ये तुमसे तुम्हारी बधू पूंछती है

सभा में नग्न आज करवा रहे हो ,॥कहो कुछ जुवां क्या घिसी जा रही है

कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया ,॥

खींच न सका वो दुशासन भी हारा समझी हूं मोहन इशारा तुम्हारा

कि साड़ी के हर तार में तुम छिपे हो ,॥इसी से ये साड़ी बढ़ी जा रही है

कहां जा छुपे हो प्यारे कन्हैया ,॥

शौहरत थी जिनकी सारे जहाँ में, झुकाता था सर जिनको सारा जमाना,

देखो समय आज बदला है कैसा,॥की वीरों की गर्दन,

झुकी जा रही है,

कहाँ जा छुपे हों,प्यारे कन्हैया,

यहाँ लाज मेरी,लूटी जा रही है...


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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।