साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर-दर भटक के मैं तो तेरे दर पे आ गया

जब जग ने ठुकराया तेरा साया पा गया

थाम ले कलाई मेरी डूबने ना पाऊँ मैं

हारे का सहारा तू ही किसको सुनाऊँ मैं

साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

कट जाए ये जीवन बस तेरे साथ सांवरे

साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

कट जाए ये जीवन बस तेरे साथ सांवरे

दुनिया के नाते सारे झूठे और बेगाने हैं

सुख में तो सब साथ हैं दुःख में अनजाने हैं

आँखों के आँसुओं को बस तूने पहचाना

इस टूटे हुए दिल का बस तू ही ठिकाना

रूठे भले ज़माना तू रूठना ना कभी

छूटे भले ये दुनिया तू छोड़ना ना कभी

साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

कट जाए ये जीवन बस तेरे साथ सांवरे

शीश के दानी बाबा लखदातार कहाए तू

जो मन से पुकारे उसे सीने से लगाए तू

ना सोने की चाहत है ना महलों की माया

बस सिर पे बनी रहे तेरे हाथों की छाया

जब भी पुकारूँ खाटू दौड़े चले आना

अधरों पे मुरली लेके दरश दिखाना

साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

कट जाए ये जीवन बस तेरे साथ सांवरे

जीवन की इस नैया का तू ही है खिवैया रे

मझधार में न छोड़ना मेरे कन्हैया रे

तेरी चौखट ही तीर्थ है तेरा नाम सहारा

तेरे प्रेम के सागर में मिल गया किनारा

हारे का सहारा तू ही!

शीश का दानी तू!

जय श्री श्याम! जय श्री श्याम!

साँसों की ये डोरी अब तेरे हाथ सांवरे

कट जाए ये जीवन बस तेरे साथ सांवरे

तेरे हाथ सांवरे...

तेरे साथ सांवरे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।