राधा रानी धरा पर आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधा रानी धरा पर आई

राधा, रानी, धरा पर आई,

मैं तो, झूम झूम, बाँटूँ बधाई ॥

कभी, देखूँ इधर, कभी देखूँ उधर ॥

वृष, भानु की, आँखें भर आई,

मैं तो, झूम झूम, बाँटूँ बधाई।

राधा, रानी, धरा पर आई...

ढोल, बजने लगा, झांझ बजने लगे ॥

बाजी, बाजी रे, मंगल शहनाई,

मैं तो, झूम झूम, बाँटूँ बधाई।

राधा, रानी, धरा पर आई...

धूप, ढलने लगी, छाँव होने लगी ॥

ठण्डी ठण्डी, चली पुरवाई,

मैं तो, झूम झूम, बाँटूँ बधाई।

राधा, रानी, धरा पर आई...

चल, चल री सखी, कीर्ति मईया के द्वार ॥

यहाँ, जन्मी है, लाली प्यारी,

मैं तो, झूम झूम, बाँटूँ बधाई।

राधा, रानी, धरा पर आई...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।