भस्ममिट्टोरु मनमुणर्त्तुम् वेदसंगीतम्

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भस्ममिट्टोरु मनमुणर्त्तुम् वेदसंगीतम्

ज्ञानमुद्रयेन्तुम् मूर्ति

नल्कुम् तत्त्वमाहात्म्यम्

भस्ममिट्टोरु मनमुणर्त्तुम् वेदसंगीतम्

ज्ञानमुद्रयेन्तुम् मूर्ति

नल्कुम् तत्त्वमाहात्म्यम्

मोहजटिलम् तमस्साके माञ्ञुपोकुम्पोळ्

उळ्ळिल् नमःशिवाय सुकृतमन्त्रं उदयमाकेणम्

भस्ममिट्टोरु मनमुणर्त्तुम् वेदसंगीतम्

ज्ञानमुद्रयेन्तुम् मूर्ति

नल्कुम् तत्त्वमाहात्म्यम्

सूर्यनुम् चन्द्रनुम् इरुमिऴियाकुम्

भूतनाथ निन्टे पीठमेनिल्

तीर्थम् तूक़ि

सूर्यनुम् चन्द्रनुम् इरुमिऴियाकुम्

भूतनाथ निन्टे पीठमेनिल्

तीर्थम् तूक़ि

अझलुकळ् कूवळमाक्कि अवशत नीर्‌धारयाक्कि

अझलुकळ् कूवळमाक्कि अवशत नीर्‌धारयाक्कि

ओरु जन्मम् नडतळ्ळान् अडियनेत्ति...

भस्ममिट्टोरु मनमुणर्त्तुम् वेदसंगीतम्

ज्ञानमुद्रयेन्तुम् मूर्ति

नल्कुम् तत्त्वमाहात्म्यम्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।