दादी थारो सऻतयो मांडु

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: धोहे धोहे अंगने

दादी जद थारो सऻतयो मांडु

सातूॅं सुख म्हाने मिल जावै

सऻतय॓ ने जब निरखूॅं मायड़

सूरत थारी दिख जावै

लेेकर थाली, घोल के रोली ओढ़ के चुनड मैं आऊॅं

चौक पुराऊँ सऻतयो बनाऊॅं,गजरो मेहन्दी में गाऊॅं

सवा रुपयो खोपरो चूड़ाे,चढ़ताॅं आख्या भर आवे॥दादी॥

13 टिक्कियां 13 सती की सऻतये नीचे में देऊ

रोली चिरचूॅं चावल चोढू, नाल सुरंगों में लेऊँ

जया लेऊ हाथा मेहन्दी पूरो तन मन रंग जावे॥दादी॥

चारुॅं कुंटा सऻतये की ए, चारुॅं दिशा से सुख ल्यावे

सऻतयो माली चारुॅं बिन्दया मंगल गुट्टू करवावे

श्री लिखता ही सऻतये उपर श्री लक्ष्मी म्हारे घर आवे॥दादी॥

Lyrics guttu sureka

Singer pankaj Joshi

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।