नाचेगे नचाएंगे अब तो हम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नाचेगे नचाएंगे अब तो हम शगन मनाये गे

मैया की मेहर बरसी खुल जम कर के बरसी,

खुशिया झालकाए गये अब तो हम शगुन मनाये गे,

नाचेगे नचाएंगे अब तो .......

हर आशा पूरी की तूने,

हर ली हर मजबूरी तूने,

बचो को सदा खुश हाल किया मैया मेहरो वाली तूने,

नाचेगे नचाएंगे अब तो ........

दिन होली रात दिवाली है,

जब साथ माँ शेरो वाली है,

फिर क्या चिंता कैसे चिंता जब तूने ढोर सम्बाली है,

नाचेगे नचाएंगे अब तो ..........

बिन मांगे सब कुछ पाया है,

बस इतनी और तमना है,

बच्चो ने साहिल ठान लिया,

माँ को संग नचाना है,

नाचेगे नचाएंगे अब तो

नचना भी इबादत बन जांदा जे नचन दा चाज हॉवे,

ज़िन्द नचदी नु लोको कोई रोको ना तोको,

उस दी रहमत राज राज हॉवे,

घर बेठिया हाज हॉवे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।