तेरे नाम दी कमली औड साईं रे मैं तो योगन बन गई

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे नाम दी कंठी माला, तेरे नाम दा ओड़ दुषाला ।

बन गयी योगन साईं तेरी, तेरे दर पे डेरा डाला ॥

तेरे नाम दी कमली औड, साईं रे मैं तो योगन बन गई ।

सारी दुनिया से नाता तोड़, साईं रे मैं तो योगन बन गई ॥

दुनिया मुझ को ताने दे या अपने गले लगाए ।

करती हूँ स्वीकार मेरे मन साईं सलोने भाए ।

लिया प्रेम दा बंधन जोड़, साईं रे मैं तो योगन बन गई ॥

तेरे सिवा ना कोई दूजा भाता हैं आँखों को ।

तेरे नाम दा सुमिरन करके चैन मिले साँसों को ।

जीने ना पाउंगी तुझको छोड़, साईं रे मैं तो योगन बन गई ॥

कौन है अपना कौन पराया, जान गई हूँ साईं ।

तू है अपना जग है पराया मान गई हूँ साईं ।

यह मोह की मटकी फोड़, साईं रे मैं तो योगन बन गई ॥

हीरे मोती रतन अमोलक कुछ नहीं मुझको लेना ।

रुपया पैसा सोना चांदी इस जग को दे देना ।

मैं मांगू चरण विच ठोर, साईं रे मैं तो योगन बन गई ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।