कौन दिशा में तेरी बाजी रे मुरलिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – कौन दिशा में लेके।

कौन दिशा में तोरी,

बाजे रे मुरलिया,

सूरत प्यारी ओ बनवारी,

जरा देखन दे, देखन दे,

कौन दिशा में तेरी,

बाजे रे मुरलिया॥

मुरली की धुन सुनके सभी है,

दर्शन को बेचैन हो,

राधा की सुधबुध खोई है,

कैसे कटेगी रैन हो,

पंख पखेरू अरु नर नारी,

सबके व्याकुल नैन हो,

अंखियों से दूर कहां,

गया ओ रे छलिया,

सूरत प्यारी ओ बनवारी,

जरा देखन दे, देखन दे,

कौन दिशा में तेरी,

बाजे रे मुरलिया ॥

गोकुल वासी भी व्याकुल है,

कब आओगे गांव हो,

गोपी हो या ब्रज बालाएं,

सबके थक गए पांव हो,

आओ मोहन तुमको पुकारे,

आज कदम की छांव हो,

तुमको पुकारे कान्हा,

राधा की पायलिया,

सूरत प्यारी ओ बनवारी,

जरा देखन दे, देखन दे,

कौन दिशा में तेरी,

बाजे रे मुरलिया ॥

फिर से फोड़ो राधा की मटकी,

तुम कंकरिया मार दो,

प्रेम के भूखे सब ही यहां है,

सबको आकर प्यार दो,

विप्र सुदामा को तारे हो जैसे,

भक्तों को भी तार दो,

गैया चराने आओ,

छोड़ के महलिया,

सूरत प्यारी ओ बनवारी,

जरा देखन दे, देखन दे,

कौन दिशा में तेरी,

बाजे रे मुरलिया ॥

कौन दिशा में तोरी,

बाजे रे मुरलिया,

सूरत प्यारी ओ बनवारी,

जरा देखन दे, देखन दे,

कौन दिशा में तेरी,

बाजे रे मुरलिया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।