सुननी यशोदा नन्द दिए रानिए नी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुन नी यशोदा नंद दिए रानिए नी,

काहनूं बनेया ऐ कृष्ण कन्हाई---

के तैनूं बड़ा पाप लगना --- है के तैनूं बड़ा --

ओ लोकां पीछे लग के तूं सांवरे नूं भूल ग‌ई--

ओ हीरेयां नूं छड़ के तूं कोडि़या ते डूल ग‌ई---

हो तैनूं सांवरे दी समझ ना आई ---

के तैनूं बड़ा पाप लगना -- सुन नी यशोदा नंद

तूं की जाने मैया ऐ तां वृज दा शिंगार ऐ---

ऐहदे बिना सूना सूना लगदा संसार ऐ---

हो ऐहने वृज विच रोशनी फैलाई ---

के तैनूं बड़ा पाप लगना --- सुन नी यशोदा नंद

कोमल शरीर ऐहदा दुःख न‌ईयो झलदा---

ऐहना क्यों खलार पाया निक्की निक्की गल दा---

नी तू हो गई आज शुदाई --- के तैनूं बड़ा पाप लगना

सुन नी यशोदा नंद दिए रानिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।