एल्लेल्लु निन्नने काणुवे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एल्लेल्लु निन्नने काणुवे एल्लरम्म एल्लम्मा…

बल्ळिदरिगे भाग्यदेवि पुल्लनयने कायम्म॥

॥एल्लेल्लु॥

चरणाश्रित जन रक्षकेये निरुपम महिमान्वितळे।

मोरे इडुवे कर मुगिवे परिपालिसु नी बा बा॥

सुरजनरिं वंदितळे वरव नीडि पोरेये तायि।

मोरे इडुवे कर मुगिवे परिपालिसु नी बा बा॥

॥एल्लेल्लु॥

तनु बत्तले नीनोल्ले मन बेत्तलेगोलिवे नीनु।

अनुदिनवु निनागि तनु मन धन एन्नुवे नानु॥

कनस्सु मनस्सिनल्लि एंदु नेनेयुतिरुवे निन्न महिमे।

अनुदिनवु निनागि तनु मन धन एन्नुवे नानु॥

॥एल्लेल्लु॥

माधव हरि वेदव्यासना दासन नी कायुवुदम्म।

साधु संतरणु नी मोददलि पोरेयुवुदम्म॥

आदरदलि ध्यान भकुति नी दयदलि नीडम्म।

साधु संतरणु नी मोददलि पोरेयुवुदम्म॥

॥एल्लेल्लु॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।