मेरो गुजारो चलाय रही है झुंझुनूं की सेठाणी राणीसती महाराणी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : करके इशारो बुलाय गई रे

मेरो गुजारो चलाय रही है

झुंझुनूं की सेठाणी

राणीसती महाराणी

आने लगे हैं, मंदिर जबसे...

किस्मत, हमारी, चमकाय रही है

झुंझुनूं की सेठाणी

राणीसती महाराणी

हे दादी तेरी, खूब दया है...

बच्चों, को आगे, बढाय रही है

झुंझुनूं की सेठाणी

राणीसती महाराणी

मेरे परिवार को, यूं ही निभाना...

जैसे, अबतक, निभाय रही है

झुंझुनूं की सेठाणी

राणीसती महाराणी

अम्बरीष बोले, ये ही कृपा है...

भादव, में चुनड़ी, चढ़वाय रही है

झुंझुनूं की सेठाणी

राणीसती महाराणी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।