मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम , वृन्दावन नगरी आया हूँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,

मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,

सुना है मैंने तेरे दर पे , सबकी बिगड़ी हैं बनती ,

तेरे एक इशारे पे ये, सारी दुनिया हैं चलती,

सुना है मैंने तेरे दर पे , सबकी बिगड़ी हैं बनती ,

तेरे एक इशारे पे ये, सारी दुनिया हैं चलती,

मेरी भी बिगड़ी बना दे श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,

मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,

मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,

कब से खड़ा हूँ द्वार पे तेरे , दर्शन की लेकर आस,

मुझको भी तुम दोगे दर्शन, मुझको है विश्वास,

कब से खड़ा हूँ द्वार पे तेरे , दर्शन की लेकर आस,

मुझको भी तुम दोगे दर्शन, मुझको है विश्वास,

मुझे दे दो दरश मेरे श्याम , मैं तेरी नगरी आया हूँ ,

मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,

मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,

मिल गया मुझको दर्शन तेरा, मिल गई दुनिया सारी,

तेरी इस नगरी से अब ना जाऊं , मैं बाके बिहारी,

मिल गया मुझको दर्शन तेरा, मिल गई दुनिया सारी,

तेरी इस नगरी से अब ना जाऊं , मैं बाके बिहारी,

मुझे रख ले बना के दास , मैं तेरी नगरी आया हूँ,

मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,

मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।