गोविंद हरे गोपाल हरे जय जय प्रभु दीन दयाल हरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोविंद हरे गोपाल हरे

गोविंद हरे, गोपाल हरे,

जय जय, प्रभु दीन, दयाल हरे ॥

तुम, तीन लोक के, स्वामी हो ।

प्रभु, घट घट, अन्तर्यामी हो ॥

है जग में, तुमसे, कौन परे,

गोविंद हरे, गोपाल हरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

माया, में फंसे, हरि भूल गए ।

झूठी, दुनियाँ पे, फूल गए ॥

उस, के कारण, भव कूप गिरे,

गोविंद हरे, गोपाल हरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

मेरे, मन मंदिर में, आ जाओ ।

प्रभु, जगमग ज्योत, जला जाओ ॥

भक्तों, के तुमने, कष्ट हरे,

गोविंद हरे, गोपाल हरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

जन्मो, के बिछड़े, मिल जाओ ।

मेरा, जीवन मरण, मिटा जाओ ॥

हम, आन पड़े, तेरे द्वार खड़े,

गोविंद हरे, गोपाल हरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

माया ने, सब कुछ, भुला दिया ।

तेरा, नाम कभी ना, याद किया ॥

मैंने, जनम मेरा, वर्बाद किया,

बैठा रहा, हाथ पे, हाथ धरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

नईया है, भंवर में, आन पड़ी ।

रोती हूँ, प्रभु जी, खड़ी खड़ी ॥

हम, द्वार तुम्हारे, आन पड़े,

अब, तुम बिन संकट, कौन हरे ।

गोविंद हरे, गोपाल हरे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।