अदालत तुम्हें अब, लगानी पड़ेगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अदालत तुम्हें अब, लगानी पड़ेगी

ज़मानत मेरी भी, करानी पड़ेगी

खड़ा कटघरे में हूँ, मुजरिम के जैसे

मिलेगी रिहाई, बता मुझको कैसे

जो इंसाफ की तुम, कलम थामे बैठे

उसे हक में मेरे, चलानी पड़ेगी।

ज़मानत मेरी भी, करानी पड़ेगी...

सज़ा काट ली है, बहुत इस जनम में

लिखा क्या है बोलोना, मेरे करम में

बँधी बेड़ियाँ जो ये, माया की मुझपे

इन्हें काट कर अब, हटानी पड़ेगी।

ज़मानत मेरी भी, करानी पड़ेगी...

गुनाहों की गिनती, अगर तुम करोगे

तो फिर कैसे दामन, दया से भरोगे

जो करुणा का सागर, है दिल में तुम्हारे

लहर दीनू पे अब, बहानी पड़ेगी

ज़मानत मेरी भी, करानी पड़ेगी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।