कान्हा मेरे मुरली वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मेरे मुरली वाले, करूणा तो बरसाओ

आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी, अब तो मुझे सम्हालो!!

दर्शन दे दो ना 2 दर्शन दे दो ना!!

अपना तुझको मान के कान्हा, तोड़ दिया सब नाता।

कश्ति मेरी ना, डूबने दोगे, तुझपे है ये भरोसा॥

क्या जतन करूं बोलो कान्हा,2, पतवार मेरी जो बन जाओ

आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी, अब तो मुझे सम्हालो!

दर्शन दे दो ना 2 दर्शन दे दो ना!!

छोड़ आया हूं सारा जमाना, तेरे भरोसे कान्हा।

कोई नहीं है मेरा जग में, तु ही एक सहारा॥

क्या जतन करुं बोलो कान्हा,2 तुम नैनो में बस जाओ।

आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी, अब तो मुझे सम्हालो!!

दर्शन दे दो ना 2 दर्शन दे दो ना!! 2

जग सुना लगता है हरदम, तेरे बिना मेरे कान्हा।

अब तो भक्ति दे दो मोहन,जीवन में हैं अंधेरा।

क्या जतन करुं बोलो कान्हा,2 तुम दर्शन मुझको दे जाओ।

आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी, अब तो मुझे सम्हालो!!

दर्शन दे दो ना 2 दर्शन दे दो ना!!

कान्हा मेरे मुरली वाले, करूणा तो बरसाओ

आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी, अब तो मुझे सम्हालो!!

दर्शन दे दो ना, कान्हा आओ ना, दर्शन दे दो ना ,कान्हा आओ ना॥

लेखक,गायक

पंडित मनोज नागर - 9893377018

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।