चन्न चढ़िया ते होईयां रोशनाईयां नी नंद घर पुत्त जमिया

नन्द दास श्यामानंदी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चन्न चढ़िया ते होईयां रोशनाईयां, नी नंद घर पुत्त जमिया

पुत्त जमिया ते मिलन बधाईआं, नी नंद घर पुत्त जमिया

गोकुल वासियां दे पूरे होये चा ने,

बनके गोपाल भगवान गए आ ने

ब्रज वसीयां ने खुशीयां मनाईयां, नी नंद...

भीड़ नाल भरे नन्द बाबा दे द्वारे ने,

कृष्ण कन्हैया दे गूंजदे जयकार ने,

वजन वाजे, वजन शहनाईयां, नी नंद...

हुस्न दा साकी श्याम, नूर ब्रह्मण्ड दा,

नीलमणि जग तों निराला श्याम लगदा,

सारा जग करदा वडियाईयां, नी नंद...

नज़र उतारे मां यशोदा वारे वारदी,

सिक सबनू मधुप लगी ए दीदार दी,

कान्हा पलने च लवे अंगड़ाईयां, नी नंद...

स्वर: नन्द दास श्यामानंदी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।