ईश्वर को पहचान ले मनवा

किशोर कुमार
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॥ पावन पाठ ॥

ईश्वर को पहचान ले

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले,

मंदिर-मस्जिद दूर नहीं, अपने दिल में जान ले।

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले।

जिसमें प्रेम की ज्योति जले, वही प्रभु का द्वार है,

दीन-दुखी की सेवा करना, सबसे बड़ा उपकार है।

हर प्राणी में रूप उसी का, मन में ये तू मान ले,

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले।

ना धन माँगूँ, ना मैं दौलत, ना जग की शान माँगूँ,

बस तेरे चरणों में प्रभु, सच्चा ज्ञान माँगूँ।

झूठ-कपट को छोड़ दे मनवा, प्रेम की राह पहचान ले,

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले।

साँस-साँस में नाम तेरा, धड़कन में तू रहता,

अँधियारे जीवन में आकर, प्रेम का दीपक देता।

आँखें खोल के देख ज़रा तू, हर दिल में भगवान ले,

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले।

हे प्रभु! इतनी कृपा करना, मन में अहंकार न आए,

तेरी भक्ति में जीवन बीते, होंठों पर तेरा नाम आए।

प्रेम बाँटता चल रे मनवा, यही प्रभु का ज्ञान ले,

ईश्वर को पहचान ले, मनवा तू पहचान ले।

लेखक: किशोर कुमार

मोबाइल.7054026310

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।