हो भोले बाबा से प्यार हो गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा से प्यार हो गया

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो गया ॥

प्यार, हो गया, भोले से, प्यार हो गया ॥

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो गया ॥

हरिद्वार से, जल भर लाई,

तेरी, कावड़ लाई हो, तेरी, कावड़ लाई हो ।

देख, तेरी जटा में गंगा,

फ़ूली, ना समाई हो, फ़ूली, ना समाई हो ॥

हो हो हो, गंगा का, दीदार हो गया ।

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो...

घिस, घिस मैं, चंदन लाई,

भर, कटोरा लाई हो, भर, कटोरा लाई हो ।

देख, तेरे माथे पे चन्दा,

फ़ूली, ना समाई हो, फ़ूली, ना समाई हो ॥

हो हो हो, चन्दा का, दीदार हो गया ।

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो...

फ़ूलों, का हार बनाया,

तेरे, दर पे लाई हो, तेरे, दर पे लाई हो ।

देख, तेरे सर्पों की माला,

फ़ूली, ना समाई हो, फ़ूली, ना समाई हो ॥

हो हो हो, सर्पों का, दीदार हो गया ।

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो...

बर्फी, और पेड़ा ले के,

तेरे, दर पे आई हो, तेरे, दर पे आई हो ।

देख, तेरा भांग धतूरा,

फ़ूली, ना समाई हो, फ़ूली, ना समाई हो ॥

हो हो हो, भंगिया का, दीदार हो गया ।

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो...

ढोलक, और मंज़ीरा ले के,

तेरे, दर पे आई हो, तेरे, दर पे आई हो ।

देख, तेरे हाथ में डमरू,

फ़ूली, ना समाई हो, फ़ूली, ना समाई हो ॥

हो हो हो, डमरू का, दीदार हो गया ।

हो हो हो, भोले, बाबा से, प्यार हो...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।