नंदी पे हो के सवार भोले जी मेरे घर आना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नंदी पे हो के सवार

नंदी पे, हो के सवार,

भोले जी, मेरे घर आना ॥

घर, आना मेरे, घर आना ॥

नंदी पे, हो के सवार, भोले...

माथे, भोले के, चंदा विराजे ॥

जटा में, बहे गंगा धार,

भोले जी, मेरे घर आना ।

नंदी पे, हो के सवार, भोले...

कान, भोले के, कुण्डल विराजे ॥

गले में, सर्पों का हार,

भोले जी, मेरे घर आना ।

नंदी पे, हो के सवार, भोले...

हाथ, भोले के, डमरू विराजे ॥

अंग, सोहे, मृग छाल,

भोले जी, मेरे घर आना ।

नंदी पे, हो के सवार, भोले...

संग, भोले के, गौरां विराजे ॥

गोदी में, गणपति लाल,

भोले जी, मेरे घर आना ।

नंदी पे, हो के सवार, भोले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।