इस बार सावन में बन ठन के आना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इस बार सावन में बन ठन के आना

इस बार, सावन में, बन ठन के आना ॥

गौरां, को लाना भोले, गणपत को लाना ॥

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ॥

मेरे, अंगना में, मेघा बहुत है ।

मेघा, बहुत है, पानी बहुत है ।

अपनी, यह गंगा भोले, घर रख आना ।

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ।

इस बार, सावन में, बन ठन के...

मेरे, अंगना में, उज़ाला बहुत है ।

उज़ाला, बहुत है, उज़ाला बहुत है ।

अपना, यह चंदा भोले, घर रख आना ।

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ।

इस बार, सावन में, बन ठन के...

मेरे, घर में, बच्चे हैं छोटे ।

छोटे, छोटे हैं, छोटे छोटे ।

अपने, काले सांपों को, घर छोड़ आना ।

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ।

इस बार, सावन में, बन ठन के...

सास, ससुर मेरे, बूढ़े बहुत हैं ।

बूढ़े, बहुत हैं, बूढ़े बहुत हैं ।

डमरू, की तान भोले, डम डम बजाना ।

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ।

इस बार, सावन में, बन ठन के...

मेरी, गलियों में, ऊँची नीची सीढ़ियाँ ।

ऊँची, नीची सीढ़ियाँ, ऊँची नीची सीढ़ियाँ ।

पैदल, ही आना भोले, नंदी ना लाना ।

देर, ना लगाना भोले, देर ना लगाना ।

इस बार, सावन में, बन ठन के...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।