भोले तुमसे मिलने का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले तुमसे मिलने का

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही बहाना है ॥

एक लोटा जल, बेलपत्र, हमें भोले पर, चढ़ाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

हरिद्वार में, ढूँढा तुम्हें, काशी में, पाया है ॥

हिमाचल के, पर्बत पे, मेरे भोले का, ठिकाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

फूलों में, ढूँढा तुम्हें, कलियों में, पाया है ॥

हरे, बेलपत्रों में, मेरे भोले का, ठिकाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

सूरज में, ढूँढा तुम्हें, चंदा में, पाया है ॥

तारों की, चम चम में, मेरे भोले का, ठिकाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

यमुना में, ढूँढा तुम्हें, गंगा में, पाया है ॥

सागर की, लहरों में, मेरे भोले का, ठिकाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

जंगल में, ढूँढा तुम्हें, पेड़ों में, पाया है ॥

हरी, हरी भंगियाँ में, मेरे भोले का, ठिकाना है

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

मंदिरों में, ढूँढा तुम्हें, घर-घर में, पाया है ॥

भक्तों के, हृदय में, मेरे भोले का, ठिकाना है ।

भोले, तुमसे मिलने का, सावन ही...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।