शँकर जी कहें सुनो पार्वती

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शँकर जी कहें सुनो पार्वती

धुन-दिल लूटने वाले जादूगर

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती,

दुनियाँ में, किसी का, कोई नहीं ॥

सब जीते जी के, नाते हैं,

और, अंत समय, पर कोई नहीं ।

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...

थे, चार रतन, दशरथ जी के,

उनको, भी कैसा, भाग्य मिला ॥

जब, राम चले, वनवास उधर,

और, प्राण उड़े, तब कोई नहीं ।

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...

वनवास, चली जब, सीता जी,

रघुवर, और लक्ष्मण, साथ गए ॥

पर, वक्त पड़ा, ऐसा भारी,

जब हरण हुआ, तब कोई नहीं ।

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...

रावण, जैसा विद्वानी,

जिसे था, खुद पर, अभिमान बड़ा ॥

सोने, की लंका, राख हुई,

जब, मरण हुआ, तब कोई नहीं ।

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...

सब, धर्म का डंका, पीट रहे,

पंडित मौला, ज्ञानी ध्यानी ॥

जब, मेरा जीवन, तरण हुआ,

ईश्वर के सिवा, और कोई नहीं ।

शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।