मेरे मन मधुबन में आ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन मधुबन में आ

धुनः सारी रात तेरा तकनीं आं राह

मेरे मन मधुबन में आ, वृंदावन रैंहन वालेया।

मिठी मुरली दी तान सुना, वृंदावन रैंहन वालेया ।।

तक तक राह तेरा नैन भये बांवरे, नैंन भये बांवरे।

बोलो रे बालो कब आवोगे सांवरे, आवोगे सांवरे ।।

इन नैनों की प्यास बुझा - वृंदावन रहन वालेया.

फागुण बसंत होरी सावन बिताये हैं, सावन बिताये हैं।

तेरे देखने को कई सपने सजाये हैं, सपने सजाये हैं।।

बैठी कब से मैं आस लगा - वृंदावन रैंहन वालेया.

प्रेम का तू सिंधु, अनूठी रसधार है, अनूठी रसधार है।

रसपान को 'मधुप, जीया बेकरार है, जीया बेकरार है।।

मुझे रस की वो बूंद पिला - वृंदावन रैंहन वालेया.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।