करो हिफ़ाज़त देश की

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॥ पावन पाठ ॥

करो हिफ़ाज़त देश की

करो हिफाज़त देश की (देश प्यार का गीत)

छोड़ बनावट और दिखावट करो सजावट देश की।

प्यार मुहब्बत और वफा से, करो इबादत देश की।।

दुनियां भर में नाम है।

उतना ऊंचा काम है।।

आज हमारे भारतवर्ष का जितना ऊंचा नाम देश का,

शहिनशाहत देश की प्यार रखनां बरकरार सदा ही,

आपस में यूं उलझ उलझकर, देश का न नुक्सान करो।

देश के संविधान में रहकर, बातों का समाधान करो ।।

सुलझालौ हर उलझन मिलकर, लगी अदालत देश की-प्यार

राग-द्वेष का कोहड़ कहीं, अपंग हमें न कर डाले।

कुर्सी का यह जंग कहीं, अधरंग हमें न कर डाले ।।

राष्ट्र देश समाज सेवा से, काटो जड़ कलेश की प्यार

बढ़ों की इज्जत करना सीखो, छोटों से नित प्यार करो।

गौरवन्त कर युवा वर्ग को नारी का सत्कार करो।।

दुनियां भर में पुख्ता करदो, जड़ इस भारत देश की-प्यार

बुरी नीति और कुरीति झूठी शोहरत छोड़ दो।

बनकर निष्ठावान भारती, नाता देश से जोड़ दो।।

आत्म-मंथन करो 'मधुप' नित, करो हिफाज़त देश की-प्यार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।