डम डम डमरू वाला.. गले में नाग काला गोकुल में आके बोला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : डम डम डिगा डिगा

डम डम डमरू वाला.. गले में नाग काला

गोकुल में आके बोला.. मां से बोला

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

शिव ने सोचा.. बाल रूप देख लूं

जोगियां वेश बनाया.. नन्द के द्वारे आया

नन्द महल में आके शिव कहे..

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

सुन रे मैंया.. आया हूं बड़ी दूर से

मात यशोदा बोली.. मोतियों से भरदुं झोली

शिव कहे मुझे, भीख नही चाहिये..

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

बोली मैंया.. लौट जा या रूठ जा

लाल को लाऊं नही.. तुझको दिखाऊं नही

आया हूँ लाख कोस दूर से..

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

मैंया तेरी.. जिद के आगे हार गया

हो के निराश चले.. शिव कैलाश चले

इतने में रोने लगा कान्हुड़ा..

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

रोने लगा.. सांवरा दहाड़ के

माता समझ गई.. जोगी साधारण नही

खुद चल के आया है विश्वनाथ..

दिखला दे.. मैंया यशोदा तेरा नन्दलाला

देख लिया.. बाल रूप खुश हुवे

बोला कैलाश वाला.. जुग जुग जीवै लाला

भग्तों के संग अम्बरीष कहै..

दिखला दिया.. मैंया यशोदा ने नन्दलाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।