माँ तेरे जैसा कोई नहीं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तेरे जैसा कोई नहीं

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं,

दुनिया में लाखों रिश्ते हैं माँ,

पर तुझसा अपना कोई नहीं।

जब-जब आँख मेरी भर आई,

तूने आकर आस बंधाई,

मेरी हर इक टूटी उम्मीद को,

माँ तूने फिर से राह दिखाई।

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं…

मैंने जब भी तुझे पुकारा,

तूने सुना मेरा हर इशारा,

बिन बोले तू समझे मैया,

मन का दर्द हमारा।

लोगों ने तो साथ छुड़ाया,

अपनों ने भी दिल दुखाया,

जिस दर से मैं खाली लौटा,

तेरे दर ने गले लगाया।

माँ तेरे चरणों में आकर,

मिलता दिल को चैन यहीं,

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं।

मैं क्या दूँ तुझको उपहार माँ,

मेरे पास नहीं कुछ खास माँ,

दो आँसू और टूटा दिल है,

ले ले इनको स्वीकार माँ।

तेरी चौखट की धूल मिले बस,

इतना ही अरमान रहे,

सुख मिले चाहे दुख मिल जाए,

मुख पर तेरा नाम रहे।

मेरी साँसों की हर धुन में,

तेरे नाम से प्यारा कुछ नहीं।

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं…

जब दुनिया से हार के बैठूँ,

तेरी तस्वीर निहार के बैठूँ,

माँ तू सिर पर हाथ रखे तो,

फिर क्यों मैं लाचार के बैठूँ।

मेरी नैया डगमग डोले,

तू ही आकर पतवार संभाले,

अंधियारे में दीपक बनकर,

माँ तू मेरे रस्ते उजाले।

तेरी कृपा अगर मिल जाए,

माँ फिर डरता कोई नहीं।

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं।

अंत समय जब आँखें मूंदूँ,

तेरा ही दीदार मैं ढूँढूँ,

मेरी अंतिम साँस भी निकले,

तेरे चरणों को याद मैं करूँ।

ना मैं माँगूँ महल अटारी,

ना माँगूँ धन-दौलत सारी,

बस इतनी सी आस है मैया,

बनी रहे मुझ पर कृपा तुम्हारी।

तेरे चरणों में जगह मिल जाए,

माँ फिर माँगूँ और कुछ नहीं।

माँ तेरे जैसा कोई नहीं,

तेरे जैसा कोई नहीं,

दुनिया में लाखों रिश्ते हैं माँ,

पर तुझसा अपना कोई नहीं…

[Outro – भावुक]

माँ…

जब कोई मेरा नहीं था,

तब तू थी…

और जब कोई रहेगा नहीं,

तब भी तू ही रहेगी…

माँ तेरे जैसा कोई नहीं…

तेरे जैसा कोई नहीं…

।yrics and sung by - Lad।a Mohit

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।