बुलाके हम को बांके विहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बुला के हमको बांके बिहारी , छुप गए क्यों मुरारी ,

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !

दिखा दो हमको सूरत प्यारी , आये शरण तुम्हारी ,

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !!

ओ रे संवरिया मेरे, मैं तो रंगा हूँ तेरे रंग में , हा रंग में ,

मुझसे मिला के नज़रे , चल दो बिहारी मेरे संग में , हा संग में ,

सेवा करूँगा मैं भी तुम्हारी , बन के तेरा पुजारी ,

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

ओ रे संवरिया मेरे, दिल में छुपे हैं कई राज रे, कई राज रे ,

कैसे बताऊ मोहन तुमको दिल की सारी बात रे ,सारी बात रे,

दिल में मेरे तुम रहते हो , ओढ़ के कामल कारी ,

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है , हुए

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

हँसने लगे हैं मुझपे दुनिया के सारे लोग रे , सारे लोग रे ,

कैसा लगाया तुमने मुझको मुरारी ये रोग रे , ये रोग रे,

रोग ये दिल का तुमने लगाया , सुना के बंशी प्यारी ,

ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।