जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन : आनंद ही आनंद बरस रहा

जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

सेवाकुंज वारी के जो गुण गावे

नित उठ मंगला दर्शन पावे

कर दर्शन पावे परमानंद, जय जय श्री वृन्दावन--

हरिवंश नाम जो जाप करे

हित चौरासी का पाठ करे

राधावल्लभ रहें उसके अंग संग, जय जय श्री वृन्दावन--

महाप्रसाद से जो जन करे प्रीति

मिल जावे सहज प्रेम रस रीति

छूट जावें जग के सबरे फंद, जय जय श्री वृन्दावन--

साधु सेवा संतन संग कीजै

पावन श्री यमुना जल पीजै

मिल जावें "मधुप" राधा ब्रजचंद, जय जय श्री वृन्दावन--

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।