मस्त मलंग होके नाचे शिव शंभू, नाचे शिव शंभू

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्त मलंग होके नाचे शिव शंभू,

नाचे शिव शंभू, नाचे शिव शंभू।

डमरू की ताल पे नाचे शिव शंभू,

झूम-झूम के आज नाचे शिव शंभू॥

कांवड़ लेकर भक्त हैं आए,

बम-बम भोले सब मिल गाए।

खुश होकर फिर नाचे शिव शंभू,

भक्तों के संग नाचे शिव शंभू॥

मस्त मलंग होके नाचे शिव शंभू,

नाचे शिव शंभू, नाचे शिव शंभू।

डमरू की ताल पे नाचे शिव शंभू,

झूम-झूम के आज नाचे शिव शंभू॥

नंदी संग कैलाश के वासी,

दीनों के तुम हो अविनाशी।

कृपा बरसाकर नाचे शिव शंभू,

सबको अपनाकर नाचे शिव शंभू॥

मस्त मलंग होके नाचे शिव शंभू,

नाचे शिव शंभू, नाचे शिव शंभू।

डमरू की ताल पे नाचे शिव शंभू,

झूम-झूम के आज नाचे शिव शंभू॥

ललित गेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।