शेर पे सवार हो के आजा शेराँवालीए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेर पे सवार हो के आजा शेराँवालीए

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए ॥

शेर पे, सवार हो के, आजा ज्योतां वालीए ॥

आज, मेरे घर मईया, तेरा जगराता है ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

हरे हरे, गोबर से, अँगना लिपाऊँ माँ ।

चन्दा की, चाँदनी में, चौकी सजाऊँ माँ ।

झिलमिल, तारों की, रौशनी कराऊँ माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

मूसे पे, सवार हो के, गणपति आए माँ ।

डमरू, बजाते हुए, शिव जी भी आए माँ ।

गदा, घुमाते हुए, हनुमन जी आए माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

श्रद्धा, और भक्ति से, छत्तर चढ़ाऊँ माँ ।

जगमग, करता, मुकुट पहनाऊँ माँ ।

केसर, रौली का, तिलक लगाऊँ माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

चम्पा, चमेला का, हार पहनाऊं माँ ।

चूड़ी, पहना के तुम्हें, मेहँदी लगाऊँ माँ ।

लाल लाल, गोटे वाली, चुनरी ओढाऊँ माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

जय जयकार, बोल तेरी, ज्योत जलाऊं माँ ।

चिमटा, ढोलक, मँजीरा बजाऊँ माँ ।

सारी सारी, रात जाग, भेटें तेरी गाऊँ माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

ध्वजा, और नारियल की, भेंट चढ़ाऊँ माँ ।

मेवा हलवे, चने का, भोग लगाऊँ माँ ।

छोटी छोटी, मईया तेरी, कंज़कें बिठाऊँ माँ ।

ओ दौड़ी दौड़ी, आजा मईया, आजा शेराँवालीए ।

शेर पे, सवार हो के, आजा शेराँवालीए...

जय माता दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।