भोले तो दौड़े चले आएँगे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले तो दौड़े चले आएँगे

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ॥

मन से, पुकारो ज़रा, मन से पुकारो ॥

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, धोती ना कुर्ता ॥

भोले तो ॥।बाघंबर, में आएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, मुकुटा ना सेहरा ॥

भोले तो ॥।गंगा, ले आएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, हाथों में कंगना ॥

भोले तो ॥।रूद्रक्ष, पाएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, ढोलक मंज़ीरा ॥

भोले तो ॥।डमरू, बजाएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, मोतियन की माला ॥

भोले तो ॥।सर्प, लहराएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, लड्डू ना पेड़ा ॥

भोले तो ॥।भांग, धतूरा खाएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, मोटर ना गाड़ी ॥

भोले तो ॥।नंदी, पे आएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

भोले, को भाए ना, गोपी ना सखियाँ ॥

भोले तो ॥।गौरां, संग आएँगे,

ज़रा, मन से पुकारो ।

भोले तो, दौड़े, चले आएँगे, ज़रा मन...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।