पार्वती का शिव से नाता जैसे दीपक संग उजियारा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पार्वती का शिव से नाता,

जैसे दीपक संग उजियारा।

एक दूजे में ऐसे समाए,

जैसे नदिया में जल की धारा।

पार्वती का शिव से नाता॥

महलों की बेटी छोड़ के दुनिया,

वन में तप करने आई।

जिसके मन में शिव बसते थे,

उसको और ना कोई भाई।

धूप सही और वर्षा झेली,

मन से नाम पुकारा।

प्रेम अगर सच्चा हो दिल में,

मिलता है फिर प्यारा।

पार्वती का शिव से नाता,

जैसे दीपक संग उजियारा॥

शिव भोले थे ध्यान में बैठे,

गौरा प्रेम निभाती।

बिन बोले ही मन की बातें,

आंखों से कह जाती।

एक है शक्ति, एक है शंकर,

एक दूजे का सहारा।

शिव बिन शक्ति अधूरे जग में,

शक्ति बिन शिव बेचारा।

पार्वती का शिव से नाता,

जैसे दीपक संग उजियारा॥

ना सोने के महल की चाहत,

ना धन का कोई सपना।

गौरा ने बस शिव को मांगा,

शिव ने गौरा को अपना।

कैलाशों पर प्रेम ये गूंजे,

गूंजे जग ये सारा।

जिसने इनका नाम है पाया,

उसका बने सहारा।

पार्वती का शिव से नाता,

जैसे दीपक संग उजियारा।

एक दूजे में ऐसे समाए,

जैसे नदिया में जल की धारा।

पार्वती का शिव से नाता॥

।yrics and singer - Lad।a Mohit

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।