बड़ा पछताओगी ओ गौरा रानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बड़ा पछताओगी ओ गौरा रानी

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी ॥

ओ गौरा रानी, ओ गौरा रानी ॥

जो भोले संग, ब्याहोगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले के, सिर पर, लम्बी जटाएं ॥

कैसे, सुलझाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले की, जटायों में, गंगा बहत है ॥

डूब, तुम जाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले के, माथे पे, चंदा विराजे ॥

ठिठुर, तुम जाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले के, गले में, सर्प विराजे ॥

कि डर, तुम जाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले के, हाथों में, डमरू विराजे ॥

झूम, तुम जाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

पीतें, सदा ही, वो भंगिया के प्याले ॥

घोट, थक जाओगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भोले के, संग में, नंदी विराजे ॥

कहाँ, तुम बैठोगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

भूत-प्रेत, भोले के, साथ में रहतें ॥

तुम, किनसे बतिआयोगी, ओ गौरा रानी ॥

बड़ा, पछताओगी, ओ गौरा रानी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।