ना छप्पर ना छान्हि

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना छप्पर ना छानी सब कहेला औ ढर दानी

ना कूरता ना धोती. सर बहेला गंगा पानी

पिये ला उ गांजा खाले भांग पतिया

डिम डिम डमरू बजावे ला हमार जोगिया

बाबा अपने ही हाथे खुद भष्मासुर बनावे

फिर ओकरे ही डर से खुद भागी के जान बचावे

दोसरे के माया मे मराले मतिया हो

डम डम डमरू बाजावे ला हमार जोगिया...

केहु लिहल खजाना केहु लिहल ह सोना सिन्होरा

रौवा गजब ए बाबा हाथ लागल जहर के कटोरा

भांग पी भुलाइल रहसि दिन रतिया हो

डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया...

Hemkant jha pyasa 9831228059

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।