मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली हैं, मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली हैं,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,

मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो फूल सुहाने , वो कलिया सुहानी ,

मुझे लगती प्यारी , वो गलिया सुहानी ,

उन गलियों में श्याम की , खुशबू घुली है ,

मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,

मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो श्याम का दर्शन , वो श्याम की आंखें ,

जो करती है अपने, भक्तों से बातें ,

मेरी श्याम से जब से, आंखें मिली है ,

मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है ,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,

मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो राधा का मोहन , वो मीरा का मोहन ,

वो जिसके लिए , मीरा बन गई थी जोगन ,

मुझे भी लगन , मीरा जैसी लगी है ,

मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है ,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,

मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।